नई दिल्ली।केंद्र सरकार कारोबारी साल 2026-27 में डिसइनवेस्टमेंट और एसेट मोनेटाइजेशन से तय बजट लक्ष्य को पार करने की ओर बढ़ रही है। केंद्र सरकार ने मौजूदा कारोबारी साल में अब तक 62,124 करोड़ रुपए जुटा लिए हैं,यह 80,000 करोड़ रुपए के पूरे साल के लक्ष्य का लगभग 78 फीसदी है।मौजूदा कारोबारी साल का फिलहाल आधे से भी ज्यादा समय अभी बाकी है। केंद्र सरकार को अब अपने लक्ष्य तक पहुंचने के लिए केवल 17,876 करोड़ रुपए और जुटाने हैं।मौजूदा रफ्तार को देखते हुए माना जा रहा है कि केंद्र सरकार इस साल अपने बजट अनुमान से ज्यादा रकम जुटा सकती है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक...
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक कुल 62,124 करोड़ रुपए में से 55,757 करोड़ रुपए डिसइन्वेस्टमेंट यानी सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी बेचकर मिले हैं।वहीं एसेट मोनेटाइजेशन से 6,367 करोड़ रुपए की कमाई हुई है। केंद्र सरकार ने हाल के सालों में डिसइन्वेस्टमेंट और एसेट मोनेटाइजेशन की रकम को एक साथ मिसलेनियस कैपिटल रिसीट्स में शामिल करना शुरू किया है,इसलिए मौजूदा आंकड़ों की तुलना पुराने सालों के आंकड़ों से सीधे तौर पर करना पूरी तरह सही नहीं होगा।
2018-19 के बाद पहली बार लक्ष्य पार करने की उम्मीद
अगर केंद्र सरकार इस साल 80,000 करोड़ रुपए के बजट अनुमान से ज्यादा रकम जुटा लेती है,तो यह कारोबारी साल 2018-19 के बाद पहली बार होगा,जब वह अपने शुरुआती बजट लक्ष्य को पार करेगी।कारोबारी साल 2018-19 में केंद्र सरकार को डिसइन्वेस्टमेंट से 84,972 करोड़ रुपए मिले थे, जबकि लक्ष्य 80,000 करोड़ रुपए रखा गया था। केंद्र सरकार ने 2017-18 में भी अपने लक्ष्य से ज्यादा रकम जुटाई थी। इसके बाद लगातार कई सालों तक डिसइन्वेस्टमेंट से मिलने वाली रकम बजट अनुमान से कम रही।
एलआईसी का रहा अहम योगदान
कारोबारी साल 2026-27 में केंद्र सरकार की कमाई बढ़ाने में सबसे बड़ी भूमिका भारतीय जीवन बीमा निगम की हिस्सेदारी बिक्री की रही है। केंद्र सरकार ने एलआईसी में अपनी 6.5 फीसदी हिस्सेदारी बेचकर 31,515 करोड़ रुपए जुटाए,यह अब तक मिले कुल डिसइन्वेस्टमेंट रेवेन्यू का आधे से ज्यादा हिस्सा है।इसके अलावा कोल इंडिया में 2 फीसदी हिस्सेदारी बेचकर 5,542 करोड़ रुपए और NHPC में 6.01 फीसदी हिस्सेदारी बेचकर 4,357 करोड़ रुपए जुटाए गए। केंद्र सरकार को जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन से 3,090 करोड़ रुपए, हिंदुस्तान कॉपर से 3,041 करोड़ रुपए और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया से 2,266 करोड़ रुपए भी मिले हैं।अब केंद्र सरकार की अगली बड़ी उम्मीद IDBI Bank की स्ट्रैटजिक बिक्री से है,इसका बिक्री प्रोसेस आगे बढ़ चुका है,अगर यह डील पूरी होती है,तो सरकार को इससे बड़ी रकम मिल सकती है और वह अपने लक्ष्य से काफी आगे निकल सकती है।
पिछले साल को पीछे छोड़ा
कारोबारी साल 2025-26 में डिसइन्वेस्टमेंट और एसेट मोनेटाइजेशन से कुल 45,306 करोड़ रुपए मिले थे,यह 47,000 करोड़ रुपए के शुरुआती लक्ष्य का लगभग 96 फीसदी था,इससे पहले 2024-25 में डिसइन्वेस्टमेंट से केवल 10,163 करोड़ रुपए और 2023-24 में 16,507 करोड़ रुपए मिले थे।कारोबारी साल 2022-23 में यह रकम 35,294 करोड़ रुपए थी।
डिविडेंड से अभी कम कमाई
जहां हिस्सेदारी बिक्री से केंद्र सरकार को अच्छी रकम मिली है,वहीं सरकारी कंपनियों से मिलने वाला डिविडेंड अभी सुस्त है।कारोबारी साल 27 में अब तक डिविडेंड के जरिए 7,133 करोड़ रुपए मिले हैं। DIPAM के आंकड़ों के मुताबिक इसकी तुलना में कारोबारी साल 26 में डिविडेंड से 78,438 करोड़ रुपए की कमाई हुई थी। कुल मिलाकर केंद्र सरकार इस साल डिसइन्वेस्टमेंट और एसेट मोनेटाइजेशन के मोर्चे पर मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है।अगर आने वाले महीनों में कुछ बड़ी हिस्सेदारी बिक्री या एसेट मोनेटाइजेशन डील्स पूरी होती हैं, तो आठ साल बाद सरकार अपने बजट लक्ष्य को पार कर सकती है।