नई दिल्ली।संयुक्त राष्ट्र ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में प्रदर्शनकारियों पर सुरक्षाबलों की कार्रवाई पर चिंता जताई है।संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटारेस के प्रवक्ता की ओर से जारी बयान में पीओके में सुरक्षा स्थिति और खासतौर से शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई पर फिक्र जताई गई है।संयुक्त राष्ट्र ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को नागरिकों का हक बताते हुए आम लोगों पर कार्रवाई के लिए जवाबदेही तय करने पर जोर दिया है। बता दें कि पीओके में बीते कुछ हफ्तों में आम लोगों पर पुलिस और सुरक्षाबलों की कार्रवाई ने विश्व का ध्यान खींचा है।
जानें एंटोनियो गुटेरेस के प्रवक्ता ने क्या कहा
एंटोनियो गुटेरेस के प्रवक्ता फरहान हक ने बीते शुक्रवार को कहा कि पीओके में आम लोगों पर हिंसा करने वालों की जवाबदेही जरूरी है। महासचिव (गुटेरेस) ने इस मामले में अपने हाई कमिश्नर टर्क का समर्थन करते हैं।हमें पूरी उम्मीद है कि मिस्टर टर्क की बातों पर ध्यान दिया जाएगा।पीओके में हिंसा से जुड़े सवाल पर उन्होंने ये बात कही। मानवाधिकारों के लिए UN हाई कमिश्नर वोल्कर टर्क ने बीते महीने पीओके में हिंसा पर चिंता जताई थी।
टर्क ने क्या कहा था
मानवाधिकारों के लिए संयुक्त राष्ट्र के उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने 17 जुलाई को पीओके पर बयान जारी किया था।जिनेवा से जारी बयान में टर्क ने पीओके में हिंसा पर चिंता जताते हुए शांति बनाए रखने की अपील की थी।बयान में कहा गया कि जून से अब तक हिंसा और अशांति में दर्जनों लोग मारे गए हैं। हम इन सभी मौतों की तुरंत और स्वतंत्र जांच की मांग करते हैं।टर्क ने अभिव्यक्ति की आजादी और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार का उल्लंघन करते हुए इंटरनेट और लोगों के इकट्ठा होने पर पाबंदियों को लेकर चिंता जताई। प्रदर्शनकारियों पर की कार्रवाई के लिए अधिकारियों पर कार्रवाई के बारे में टर्क ने कहा था कि अगर शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन में शामिल लोगों को नुकसान पहुंचाया गया है तो इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए
पीओके में विरोध प्रदर्शन
बता दें कि पीओके में जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) विरोध-प्रदर्शनों की अगुवाई कर रही है।इसमें व्यापारी, ट्रांसपोर्टर,छात्र,वकील,एक्टिविस्ट और दूसरे लोग शामिल हैं। इस संगठन पर पाकिस्तान ने सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने के आरोप में आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत प्रतिबंध लगा दिया है।वोल्कर टर्क के बयान में कहा गया है कि हम अधिकारियों से आग्रह करते हैं कि वे इलाके में इंटरनेट की सुविधा सुनिश्चित करें। साथ ही स्थानीय आबादी के बुनियादी मुद्दों और शिकायतों को हल करने के लिए सार्थक और समावेशी बातचीत करें। पीओके में बीते दो महीने से लोग पाकिस्तानी आर्मी और सरकार के खिलाफ सड़कों पर हैं।