महंगाई के मोर्चे पर राहत:जुलाई में WPI घटकर 9.78%, खाने-पीने की चीजों और ईंधन के भाव पड़े नरम
महंगाई के मोर्चे पर राहत:जुलाई में WPI घटकर 9.78%, खाने-पीने की चीजों और ईंधन के भाव पड़े नरम

14 Aug 2026 |   33



 

नई दिल्ली।देश में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई जुलाई में मामूली घटकर 9.78 फीसदी रह गई। जून में थोक महंगाई दर 9.87 फीसदी थी।खाद्य वस्तुओं के साथ ईंधन और बिजली की कीमतों में नरमी से थोक महंगाई में यह गिरावट आई है। केंद्र सरकार की ओर से 2022-23 को नया आधार वर्ष बनाकर जारी किए जा रहे थोक मूल्य सूचकांक के आंकड़ों में यह पहली बार है,जब मासिक आधार पर महंगाई में कमी दर्ज की गई है।

चालू वित्त वर्ष की शुरुआत से WPI महंगाई लगातार बढ़ रही...

चालू वित्त वर्ष की शुरुआत से WPI महंगाई लगातार बढ़ रही थी।अमेरिका और ईरान में युद्ध उसके बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में नाकेबंदी से वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और उर्वरकों की लागत बढ़ी।भारत अपने कच्चे तेल के आयात के बड़े हिस्से के लिए इस मार्ग पर निर्भर है। कच्चे तेल और उर्वरकों की कीमतों में तेजी का असर खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ा,जिससे थोक महंगाई पर दबाव बढ़ा।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने जुलाई के मासिक WPI आंकड़े किए जारी 

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने शुक्रवार को जुलाई के मासिक WPI आंकड़े जारी किए।मंत्रालय के मुताबिक जुलाई 2026 में खनिज तेल यानी पेट्रोलियम उत्पाद,खाद्य वस्तुएं,बेसिक मेटल का विनिर्माण,गैर-खाद्य वस्तुएं,खाद्य उत्पादों का विनिर्माण और केमिकल तथा केमिकल उत्पादों का विनिर्माण थोक महंगाई के प्रमुख कारण रहे।

ईंधन और बिजली की महंगाई में बड़ी राहत

जुलाई में ईंधन और बिजली की थोक महंगाई घटकर 20.05 फीसदी रह गई।जून में यह काफी अधिक 27.41 फीसदी थी। खाद्य वस्तुओं की महंगाई में भी मामूली राहत मिली। खाद्य वस्तुओं की थोक महंगाई जून के 5.49 फीसदी से घटकर जुलाई में 5.44 फीसदी रह गई।हालांकि विनिर्मित उत्पादों के मोर्चे पर महंगाई का दबाव बढ़ा है।जुलाई में विनिर्मित उत्पादों की महंगाई बढ़कर 8.29 फीसदी हो गई,जो जून में 7.48 फीसदी थी।इससे संकेत मिलता है कि ईंधन और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में राहत के बावजूद विनिर्माण क्षेत्र में लागत का दबाव बना हुआ है।

आगे महंगाई से ज्यादा और राहत

ICRA के मुख्य अर्थशास्त्री राहुल अग्रवाल का कहना है कि जुलाई 2026 में थोक महंगाई दर (WPI) मामूली घटकर 9.8 फीसदी रह गई,जो जून में 9.9 फीसदी थी।यह जुलाई के लिए हमारे 10 फीसदी के अनुमान से भी थोड़ा कम रही। हालांकि महंगाई में यह कमी सभी क्षेत्रों में नहीं दिखी।इसमें गिरावट पूरी तरह ईंधन और बिजली की महंगाई कम होने के कारण आई, जबकि अन्य सभी श्रेणियों में जून के मुकाबले जुलाई में महंगाई बढ़ी है।

जुलाई में WPI आधारित खाद्य महंगाई बढ़कर 6.6 फीसदी के 19 महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई

राहुल अग्रवाल ने कहा कि जुलाई में WPI आधारित खाद्य महंगाई बढ़कर 6.6 फीसदी के 19 महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई,जो जून में 6.1 फीसदी थी।इसकी मुख्य वजह विनिर्मित खाद्य उत्पादों और ज्यादातर प्राथमिक खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी रही। हालांकि फल और सब्जियों की कीमतों में ऐसा रुझान नहीं देखा गया। इसके अलावा कोर WPI महंगाई जुलाई में बढ़कर रिकॉर्ड 8.2 फीसदी पर पहुंच गई, जो जून में 7.5 फीसदी थी। 21 में से 16 उप-क्षेत्रों में महंगाई बढ़ने से कोर WPI पर दबाव बढ़ा।

अगस्त 2026 में थोक महंगाई में ज्यादा राहत मिलने की उम्मीद

राहुल अग्रवाल ने कहा कि अगस्त 2026 में थोक महंगाई में ज्यादा राहत मिलने की उम्मीद है और इसके 9.5 फीसदी से नीचे आने का अनुमान है।मई और जून में थोक महंगाई 9.9 फीसदी के उच्च स्तर पर रही थी।हालांकि साल के ज्यादातर हिस्से में थोक महंगाई ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती है। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 में औसत WPI महंगाई करीब 8.5 फीसदी रहने का अनुमान है।ऊंची थोक महंगाई से नॉमिनल जीडीपी वृद्धि का आंकड़ा भी ऊंचा रह सकता है।

बजाज ब्रोकिंग के फंडामेंटल एनालिस्ट शाश्वत सिंह का ये कहना है 

बजाज ब्रोकिंग के फंडामेंटल एनालिस्ट शाश्वत सिंह का कहना है कि वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की थोक महंगाई में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है।अप्रैल से जुलाई के दौरान WPI आधारित महंगाई औसतन 9.47 फीसदी रही,जबकि वित्त वर्ष 2025-26 की समान अवधि में यह माइनस 0.20 फीसदी थी।जुलाई 2026 में थोक महंगाई मामूली घटकर 9.78 फीसदी रही,जो जून में 9.87 फीसदी और संशोधित आंकड़ों के मुताबिक मई में 9.88 फीसदी थी।सभी वस्तुओं का WPI सूचकांक भी जून के 110.2 से घटकर जुलाई में 110.0 रह गया।

अलग-अलग श्रेणियों में महंगाई का रुझान अलग

शाश्वत सिंह ने कहा कि अलग-अलग श्रेणियों में महंगाई का रुझान अलग रहा।प्राथमिक वस्तुओं की महंगाई जुलाई में बढ़कर 8.52 फीसदी हो गई और इसका सूचकांक 117.2 रहा।इसमें गैर-खाद्य वस्तुओं की महंगाई 17.66 फीसदी और खनिजों की महंगाई 13.28 फीसदी रही।हालांकि‌ खाद्य वस्तुओं की महंगाई मामूली घटकर 5.44 फीसदी रह गई।
शाश्वत ने कहा कि आने वाले समय में इन आंकड़ों में संशोधन पर भी नजर रखना जरूरी होगा।जुलाई के शुरुआती आंकड़ों के लिए प्रतिक्रिया दर 78.55 फीसदी रही, जबकि मई के अंतिम आंकड़ों में यह 98.14 फीसदी थी। थोक महंगाई अभी भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई है और प्राथमिक वस्तुओं तथा विनिर्मित उत्पादों की कीमतें इस पर दबाव डाल रही हैं।

खुदरा महंगाई बढ़कर 4.45 फीसदी

बता दें कि इससे पहले इसी सप्ताह जारी आंकड़ों के मुताबिक देश की खुदरा महंगाई दर जुलाई में बढ़कर 4.45 फीसदी हो गई। जून में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई 4.38 फीसदी थी। खाद्य वस्तुओं की ऊंची कीमतें खुदरा महंगाई बढ़ने की प्रमुख वजह रहीं।भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने इस महीने की शुरुआत में प्रमुख नीतिगत रीपो दर को 5.25 फीसदी पर बरकरार रखा था।आरबीआई ने अल-नीनो की स्थिति के बीच दक्षिण-पश्चिम मानसून में कमी और बारिश के असमान वितरण को देखते हुए वित्त वर्ष 2026-27 के लिए खुदरा महंगाई का अनुमान 5 फीसदी रखा है।

More news