नई दिल्ली।मिडिल ईस्ट में तनाव से कच्चे तेल की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई थी,जिससे जून तिमाही में भारत का कच्चा तेल आयात बिल पिछले साल के मुकाबले 26 फीसदी बढ़ गया,इंपोर्ट वॉल्यूम में 18 फीसदी की गिरावट आई।भारत सालाना लगभग 2 अरब बैरल कच्चा तेल आयात करता है।यही कारण है कि तेल की कीमत में प्रति बैरल 1 डॉलर की बढ़ोतरी से उसका बिल करीब 18,000 करोड़ रुपये बढ़ जाता है। इस स्थिति से बचने के लिए केंद्र सरकार अब दो स्ट्रैटजिक पेट्रोलियम रिजर्व बनाने की योजना बना रही है।
मिंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक...
मिंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र सरकार राजस्थान के बीकानेर और मध्य प्रदेश के बीना में दो स्ट्रैटजिक पेट्रोलियम रिजर्व बनाने की तैयारी में है।पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा संसद की एक स्थायी समिति को दी जानकारी के मुताबिक बीकानेर की फैसिलिटी को लेकर फिजिबिलिटी स्टडीज पूरी हो चुकी है और इसे अंतिम रूप दिया जा रहा है। बीना फैसिलिटी को लेकर प्री-फिजिबिलिटी स्टडी हो चुकी है और डिटेल्ड फिजिबिलिटी स्टडी होनी है।
सबसे बड़ा भंडार
चीन के पास विश्व का सबसे बड़ा स्ट्रैटजिक पेट्रोलियम रिजर्व है।एक अनुमान के मुताबिक चीन के एसपीआर करीब 1,397 मिलियन बैरल का है।इसके बाद अमेरिका,जापान,ओईसीडी यूरोप,साउथ कोरिया का नंबर है।भारत का स्ट्रैटजिक ऑयल रिजर्व लगभग 21 मिलियन बैरल का है। भारतीय नीति निर्माताओं की यह धारणा रही है कि फारस की खाड़ी के पास होने के कारण भारत को बड़े रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार की जरूरत नहीं है,लेकिन ईरान युद्ध ने इसे बदलकर रख दिया है।
भारत विश्व में कच्चे तेल की तीसरा बड़ा आयातक
भारत विश्व में कच्चे तेल की तीसरा बड़ा आयातक है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 88 फीसदी क्रूड ऑयल आयात करता है।आयात बिल बढ़ने से महंगाई,ग्रोथ,चालू खाते का घाटा बढ़ जाता है और रुपये पर दबाव बढ़ता है। पहली तिमाही में रूस एक बार फिर भारत का टॉप क्रूड सप्लायर बना रहा। कुल आयात में उसकी हिस्सेदारी 40 फीसदी से अधिक रही। उसके बाद संयुक्त अरब अमीरात (14.6 फीसदी), सऊदी अरब (9.9 फीसदी), वेनेज़ुएला (5.2 फीसदी) और ओमान (4.5 फीसदी) प्रमुख सप्लायर थे।