सावन में प्याज की ललकार:लासलगांव मंडी में 25% उछला भाव, क्या 50 के पार जाएगा 
सावन में प्याज की ललकार:लासलगांव मंडी में 25% उछला भाव, क्या 50 के पार जाएगा 

14 Aug 2026 |   33



 

नई दिल्ली।सावन में बहुत से लोग प्याज-लहसून से भले ही परहेज करते हों,लेकिन मांग कम होने के बावजूद दाम कम होने के बजाय तेजी से बढ़ रहे हैं।महाराष्ट्र के नासिक के लासलगांव मंडी में प्याज के थोक भाव में जबरदस्त वृद्धि देखी गई है।बीते पांच कारोबारी दिनों में औसत भाव 25 फीसदी बढ़ गया है। 8 अगस्त को जहां प्याज 2,180 रुपए प्रति क्विंटल बिक रहा था, वहीं गुरुवार को यह बढ़कर 2,760 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंच गया।बुधवार को औसत कीमत 27 रुपए प्रति किलो पर थी, जो 5 अगस्त के 21.50 रुपए से करीब 25 फीसदी अधिक है। अच्छी क्वालिटी वाले प्याज की कीमत इस दौरान 24 से बढ़कर 30 रुपए प्रति किलो हो गई।

दूसरे शहरों में इसका असर आने वाले कुछ दिनों में तेजी से दिखना शुरू हो जाएगा

दूसरे शहरों में इसका असर आने वाले कुछ दिनों में तेजी से दिखना शुरू हो जाएगा,लेकिन कुशीनगर में प्याज की रिटेल कीमत 40 रुपये किलो हो गई है। विक्रेता रामकेवल जायसवाल के मुताबिक रेट आगे से ही चढ़ा हुआ आ रहा है। एक हफ्ते पहले तक फुटकर भाव 32 से 35 रुपये किलो था। अगर ऐसा ही रहेगा तो अगले कुछ दिनों में प्याज अर्धशतक लगाएगा। यानी भाव 50 रुपये किलो के पार भी हो सकते हैं।

रेट पर लगाम लगाने के लिए सरकार की क्या है तैयारी

कीमतों पर लगाम लगाने के लिए सरकार सितंबर के पहले हफ्ते से बफर स्टॉक में रखे प्याज को बेचना शुरू करने जा रही है।इस सरकारी कोशिश के बावजूद कि खरीदारी को बढ़ावा देने के लिए न्यूनतम खरीद मूल्य को सात बार बढ़ाया गया, लेकिन इस साल प्याज की खरीदारी लक्ष्य 200,000 टन से करीब 25 फीसदी कम रहने का अनुमान है।

कीमत बढ़ने की क्या है वजह

प्याज के भाव बढ़ने का मुख्य कारण दक्षिण भारत से खरीफ फसल की आवक में देरी है।बीज बोने में देरी होने के कारण यह फसल अभी तक नहीं आई है। महाराष्ट्र में भी मानसून की देरी से खरीफ की बुआई लेट हुई है, जिससे नासिक क्षेत्र की फसल भी विलंबित होगी। ऐसे में दक्षिण की फसल का महत्व और बढ़ गया है।

क्या रबी फसल से नहीं मिल रही राहत

मार्च-अप्रैल में भंडारण में जाने वाली रबी की फसल अक्टूबर तक देश के लिए प्याज की मुख्य स्रोत होती है। इसके बाद कर्नाटक,तेलंगाना और आंध्र प्रदेश से छोटी खरीफ फसल मिलती है और फिर अक्टूबर से महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश से मुख्य खरीफ फसल की आवक शुरू होती है। हालांकि इस साल रबी प्याज की पैदावार और स्टोरेज में कोई कमी नहीं है, लेकिन इसकी क्वालिटी अच्छी नहीं है। कारोबारियों के मुताबिक अनियमित मौसम के चलते भारत ही नहीं, दुनिया भर में प्याज की गुणवत्ता पर इसका असर पड़ा है।

क्या होगा आगे

प्याज निर्यातक दानिश शाह का कहना है कि आने वाले हफ्तों में प्याज की कीमतें मजबूत बनी रहेंगी।हालांकि असली तस्वीर सितंबर के मौसम पर निर्भर करेगी। अगर बारिश दक्षिण भारत की नई फसल को नुकसान पहुंचाती है, तो कीमतों पर और दबाव बढ़ सकता है। वहीं अगर नई फसल अच्छी आती है, तो कीमतें काबू में रहेंगी।

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