दिल्ली में बाघ और भालू को ले सकेंगे गोद,चिड़ियाघर में जल्द शुरू होगी सुविधा,जानें एक दिन के लिए कितना लगेगा शुल्क
दिल्ली में बाघ और भालू को ले सकेंगे गोद,चिड़ियाघर में जल्द शुरू होगी सुविधा,जानें एक दिन के लिए कितना लगेगा शुल्क

16 Feb 2026 |   19



 

नई दिल्ली।क्या आप भी एनिमल लवर हैं,क्या आप पशुओं को गोद लेते हैं,अगर हां तो आपके लिए ये खबर काम की है। दिल्ली में छोटे-मोटे जानवरों के अलावा खूंखार बाघ को भी गोद ले सकते हैं।राष्ट्रीय प्राणी उद्यान (चिड़ियाघर) में मार्च से एक नई पहल शुरू होने जा रही है।अब दिल्ली के लोग अपना जन्मदिन, विवाह की वर्षगांठ या कोई भी खास अवसर चिड़ियाघर के वन्यजीव को एक दिन के लिए गोद लेकर मना सकेंगे।

बाघ गोद लेने की 1 दिन की रकम 50 हजार रुपये

वन-डे एनिमल एडाप्शन योजना के तहत 500 रुपये से लेकर 50 हजार रुपये तक की राशि निर्धारित की गई है।इस योजना के तहत पशु को गोद लेने वालों को चिड़ियाघर द्वारा निर्धारित लागत वहन करनी होगी,जिसका उपयोग जानवर के भोजन और दैनिक देखभाल के लिए किया जाएगा।चुने गए पैकेज के आधार पर व्यक्ति को स्मृति चिन्ह के रूप में प्रमाण पत्र और तस्वीरें भी मिलेंगी।पशु को गोद लेने की इस योजना के तहत छोटे जानवरों के लिए शुल्क की शुरूआत 500 रुपये से शुरू होगी। वहीं अगर आप भारी-भरकम खूंखार जानवर यानी बाघ को गोद लेना चाहते हैं, तो एक दिन गोद लेने के लिए आपको 50000 रुपये देने होंगे।

कब तक मंजूरी मिलने की उम्मीद

चिड़ियाघर के निदेशक डॉ. संजीत कुमार ने बताया कि अल्पकालिक पशु गोद लेने के प्रस्ताव को इस माह के अंत तक मंजूरी मिलने की संभावना है और इसे मार्च में लागू कर दिया जाएगा।उन्होंने कहा कि एक दिन के लिए गोद लेने की दर संबंधित पशु की वार्षिक गोद लेने की राशि के आधार पर तय की गई है।

अन्य जानवरों के लिए क्या है रेट

निदेशक संजीत कुमार ने कहा,यदि किसी जानवर को गोद लेने की वार्षिक लागत 50,000 रुपये है, तो उसे एक दिन के लिए गोद लेने का शुल्क लगभग 500 रुपये होगा।संशोधित दरों के अनुसार,चित्तिदार हिरण को गोद लेने की वार्षिक लागत 18,000 रुपये है और उसे एक दिन के लिए 500 रुपये में गोद लिया जा सकता है। इसी प्रकार स्‍लॉथ बियर को गोद लेने की वार्षिक दर 45,000 रुपये है और उसे भी एक दिन के लिए 500 रुपये में गोद लिया जा सकेगा।

बाघ की सालाना फीस 6 लाख रुपये

निदेशक कुमार ने बताया कि बाघ को गोद लेने की वार्षिक लागत छह लाख रुपये है, जो एक दिन के लिए लगभग 50,000 रुपये होती है। उन्होंने कहा कि चिड़ियाघर इस योजना को अधिक सुलभ बनाने के लिए अल्पकालिक और ऑनलाइन गोद लेने के विकल्प पेश कर रहा है, जो पहले पूरी तरह से ऑफलाइन थे,खासकर उन व्यक्तियों के लिए जो पूरे वर्ष के लिए किसी जानवर को गोद नहीं ले सकते हैं।

पर्यटकों की संख्या और राजस्व में होगी बढ़ोतरी

निदेशक कुमार ने बताया कि इस पहल से पर्यटकों की संख्या बढ़ाने और अतिरिक्त राजस्व उत्पन्न करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।साल 2022 में शुरू किए गए पशु को गोद लेने के कार्यक्रम का उद्देश्य पशु संरक्षण को बढ़ावा देना और लोगों का वन्यजीवों के साथ जुड़ाव मजबूत करना है।फिलहाल चिड़ियाघर एक या दो साल के लिए जानवरों को गोद लेने की अनुमति देता है,जिनमें से अधिकांश कॉर्पोरेट संस्थाएं होती हैं।उन्होंने बताया,इस वर्ष भागीदारी में गिरावट देखी गई है, अब तक केवल चार कंपनियां ही आगे आई हैं। इसीलिए हम अधिक व्यक्तियों को आकर्षित करने के लिए प्रक्रिया को अधिक सुलभ बना रहे हैं।

ऑनलाइन गोद लेने का भी मिलेगा मौका

निदेशक कुमार ने बताया कि इस योजना में ऑनलाइन गोद लेने का विकल्प भी उपलब्ध कराया जाएगा,ताकि जो लोग पूरे वर्ष के लिए किसी पशु को गोद नहीं ले सकते,वे भी इस पहल से जुड़ सकें।उनका कहना है कि इससे आम लोगों की भागीदारी बढ़ेगी,चिड़ियाघर में आगंतुकों की संख्या में इजाफा होगा और अतिरिक्त राजस्व भी प्राप्त होगा।

चिड़ियाघर प्रशासन मुख्य प्रवेश द्वार एक डिजिटल स्क्रीन लगाने की कर रहा तैयारी 

बता दें कि चिड़ियाघर प्रशासन मुख्य प्रवेश द्वार पर एक डिजिटल स्क्रीन लगाने की भी तैयारी कर रहा है,इसमें गोद लेने के विकल्पों और चिड़ियाघर में मौजूद पशुओं की जानकारी प्रदर्शित की जाएगी।साथ ही वर्तमान में अपेक्षाकृत लंबी गोद लेने की प्रक्रिया को सरल बनाने के प्रयास भी किए जा रहे हैं, ताकि अधिक से अधिक लोग इस योजना का लाभ उठा सकें।

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