राहुल गांधी ने वीरा पासी के बहाने रायबरेली से अवध तक के दुर्ग को किया दुरुस्त
राहुल गांधी ने वीरा पासी के बहाने रायबरेली से अवध तक के दुर्ग को किया दुरुस्त

20 May 2026 |   28



 

लखनऊ।शतरंज के खेल में घोड़ा सिर्फ ढाई घर चलकर ऐसा चक्रव्यूह रच देता है,जिससे सामने वाले खिलाड़ी का निकलना आसान नहीं होता है।लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी चार महीने के बाद कल मंगलवार को अपने संसदीय क्षेत्र रायबरेली दौरे पर पहुंचे।राहुल गांधी ने दो दिवसीय दौरे में अपने सियासी दुर्ग को दुरुस्त करने के साथ-साथ उत्तर प्रदेश में बिछी सियासी बिसात पर कांग्रेस के लिए एक नई उम्मीद की किरण जगा गए।

यूपी में 2027 विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के बीच राहुल गांधी दो दिवसीय रायबरेली दौरे पर पहुंचे

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के बीच राहुल गांधी दो दिवसीय रायबरेली दौरे पर पहुंचे। राहुल गांधी ने पहले दिन तीन जनसभाएं कीं।राहुल गांधी ने महिला संवाद करते हुए रायबरेली के साथ गांधी परिवार का नाता और यहां लोगों के साथ अपनापन जताने की कोशिश करते हुए नजर आए।राहुल गांधी दूसरे दिन गेस्ट हाउस में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और क्षेत्रीय जनता से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं।इसके बाद लोधवारी गांव पहुंचे,जहां उन्होंने 1957 के क्रांतकारी वीरा पासी की प्रतिमा का अनावरण किया।वीरा पासी की जरिए सामाजिक न्याय के एजेंडे को सियासी धार देने के साथ-साथ रायबरेली से लेकर अवध तक के सियासी समीकरण साधने का राहुल गांधी ने दांव चला है।

रायबरेली में वीरा पासी की मूर्ति का अनावरण

राहुल गांधी ने अपने संसदीय क्षेत्र रायबरेली के लोधवारी गांव में महाबली वीरा पासी की प्रतिमा का भव्य अनावरण किया। वीरा पासी की मूर्ति कांग्रेस नेता राही ब्लॉक प्रमुख धर्मेंद्र बहादुर सिंह उर्फ राजू यादव द्वारा लगवाई गई थी।राहुल गांधी ने जनसभा को भी संबोधित करते हुए 1957 के महान योद्धा और रायबरेली क्षेत्र के प्रतीक रहे वीरा पासी के गौरवशाली इतिहास को सराहा।राहुल गांधी ने कहा कि आज हम वीरा पासी को याद कर रहे हैं,लेकिन जब मैं भाषण सुन रहा था तो सोच रहा था कि जो विचारधारा अंबेडकर की थी,आज उसे खत्म किया जा रहा है,ये मत सोचिए कि कोई मामूली किताब है, ये एक विचारधारा है जो अंबेडकर, गांधी और वीरा पासी के खून में थी,ये किताब आजादी के बाद लिखी गई और इसमें आपको कोई न कोई मिलेगा,जो इसके लिए लड़ा था और मरा था।गुरुनानक-कबीर बुद्ध भगवान इन सबकी आवाज इस संविधान में है। बता दें कि राहुल गांधी के इस कदम को पासी समाज के बीच कांग्रेस की मजबूत पैठ बनाने की बड़ी रणनीति माना जा रहा है।

वीरा पासी और आंबेडकर के बहाने आर‌एस‌एस पर निशाना

राहुल गांधी ने कहा कि अगर हम वीरा पासी और अंबेडकर के सामने को हाथ जोड़ते हैं तो उनकी विचारधारा का सम्मान करना हमारी जिम्मेदारी है।अंबेडकर यहां आपके सामने बैठे होते,आप लोग उनके सामने नारे लगाते,इसके बाद बाहर जाकर अंग्रेजों से हाथ मिला लेते तो ये अंबेडकर की विचारधारा पर आक्रमण होता।हम लोग फोटो के सामने हाथ जोड़ लेते हैं,लेकिन जब वीरा पासी की विचारधारा का अपमान किया जाता है, तो हम चुप हो जाते हैं।राहुल गांधी ने कहा कि आपके मुंह के सामने आरएसएस के लोग संविधान को फाड़कर फेंकते हैं तो आप चुप हो जाते हैं,ये एक किताब नहीं बल्कि आपका खून है,इसकी रक्षा करना आपकी और हमारी जिम्मेदारी है। 

वीरा पासी जी,अंबेडकर जी ने कहा था कि हिंदुस्तान में हर नागरिक एक समान है...

राहुल गांधी ने कहा कि वीरा पासी जी,अंबेडकर जी ने कहा था कि हिंदुस्तान में हर नागरिक एक समान है,हर व्यक्ति को अभ्यास का सही फल मिलना चाहिए और सभी को समान अधिकार मिलने चाहिए। राहुल गांधी ने कहा कि ये देश सबका है,किसी एक जाति या संगठन का नहीं है।यही बात देश का संविधान भी कहता है,ऐसे में संविधान में हिंदुस्तान के लोगों की आवाज है,संविधान की रक्षा करना हम सभी का कर्तव्य है।इस तरह से राहुल गांधी आरएसएस और बीजेपी को दलित विरोधी कठघरे में खड़ा करते हुए नजर आए।

वीरा पासी के जरिए दुर्ग को दुरुस्त रखने का दांव

बता दें कि वीरा पासी 1857 की क्रांति में राजा राणा बेनी माधव के सेनापति थे।अंग्रेजों ने जब राणा बेनी माधव को गिरफ्तार कर रायबरेली की जेल में बंद कर रखा था तो वीरा पासी ही जेल तोड़कर राणा बेनी माधव को बाहर निकाला था। वीरा पासी के शौर्य और स्वाभिमान पर पासी समुदाय गर्व करता है।रायबरेली ही नहीं बल्कि अवध क्षेत्र में पासी समुदाय के लोग वीरा पासी को अपना मसीहा मानते हैं।इसी राजनीतिक और सामाजिक महत्व को समझते हुए राहुल गांधी ने वीरा पासी की मूर्ति का अनावरण कर सियासी संदेश दिया है।

रायबरेली की सियासत में पासी मतदाताओं की संख्या है काफी अच्छी,किसी भी कैंडिडेट की हार-जीत तय करने में निभाते हैं अहम भूमिका 

 
रायबरेली की सियासत में पासी मतदाताओं की संख्या काफी अच्छी है।ये किसी भी कैंडिडेट की हार-जीत तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं।इसी सियासी और सामाजिक महत्व को समझते हुए राहुल गांधी ने वीरा पासी की मूर्ति का अनावरण किया।इस तरह बहुजन समाज के स्वाभिमान के बहाने अपने सियासी दुर्ग माने जाने वाले रायबरेली को दुरुस्त बनाए रखने का राहुल गांधी ने दांव चला है,जिसमें राहुल गांधी ने वीरा पासी और आंबेडकर के साथ संविधान के जरिए दलित समुदाय के विश्वास को जीतने का दांव चला है।

रायबरेली में सबसे बड़ा वोटबैंक पासी समुदाय

रायबरेली जिले में सबसे बड़ा वोटबैंक पासी समुदाय का है।रायबरेली में लगभग 5 लाख से अधिक पासी मतदाता हैं। सभी विधानसभा सीटों पर पासी मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी को मिली जीत में पासी मतदाताओं का अहम रोल था।इसके चलते ही राहुल गांधी ने रायबरेली जिले में ही नहीं बल्कि सुशील पासी को पासी चेहरे के तौर आगे बढ़ाने का काम किया है।वीरा पासी की मूर्ति अनावरण के समय राहुल गांधी के साथ सुशील पासी कंधे से कंधा मिलाकर खड़े थे।

रायबरेली से अवध को साधने का प्लान

सूबे में सियासी बिसात पर दलितों के भीतर पासी समुदाय एक भले ही खामोश है,लेकिन बेहद ताकतवर माने जाते हैं।पासी समाज के मतदाता सिर्फ रायबरेली ही नहीं बल्कि अवध क्षेत्र में अच्छे-अच्छे सियासी सूरमाओं के समीकरण बिगाड़ने की कूबत रखता है।पासी वोट बैंक सूबे की सत्ता की चाबी का एक अहम हिस्सा बन चुका है।सूबे में अनुसूचित दलितों की आबादी लगभग 21 फीसदी है।दलितों के भीतर सबसे बड़ा हिस्सा जाटव समाज का है,जो लगभग 54 फीसदी है,लेकिन इसके ठीक बाद दूसरे नंबर पर सबसे बड़ी आबादी पासी समाज की है,जो कुल दलित आबादी का लगभग 16 फीसदी है,ये सूबे की कुल आबादी का लगभग 3.2 फीसदी से अधिक है।पासी समुदाय का सबसे मजबूत प्रभाव अवध और पूर्वांचल के क्षेत्रों में है,जहां पासी मतदाता हार-जीत तय करते हैं। रायबरेली,अमेठी,लखनऊ,बाराबंकी,हरदोई,उन्नाव,सीतापुर, कौशांबी,प्रयागराज और प्रतापगढ़ जिले में पासी मतदाता अहम हैं।सूबे की लगभग 65 से 70 विधानसभा सीटों और 12 से 15 लोकसभा सीटों पर पासी मतदाता बेहद निर्णायक भूमिका में हैं।

राहुल और अखिलेश का पासी समाज पर दांव

पासी समुदाय का सियासी झुकाव समय-समय पर बदलता रहा है,जिसने सूबे की सत्ता का रुख मोड़ा है।पासी मतदाताओं के मिजाज में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पिछड़ा,दलित,अल्पसंख्यक(पीडीए)का नारा देकर पासी समुदाय को अपने पाले में लाने के लिए बड़ी बिसात बिछाई है।राहुल गांधी ने संविधान और आरक्षण के बहाने रायबरेली और अमेठी को नहीं साधा बल्कि दलित वोटबैंक का विश्वास जीतने में सफल रहे हैं। अब 2027 के विधानसभा चुनाव में पासी मतदाताओं को जोड़े रखने के लिए वीरा पासी का दांव चला है।अखिलेश यादव ने गोमती रिवर फ्रंट पर महाराजा बिजली पासी की सोने की प्रतिमा लगाने का ऐलान किया, तो राहुल गांधी ने रायबरेली में वीरा पासी की मूर्ति का अनावरण कर सियासी संदेश देने की कोशिश की है।सूबे की सियासत में पासी समुदाय की बढ़ती अहमियत को देखते हुए दांव चले जा रहे हैं।

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