दिल्ली हाई कोर्ट ने एआई से बनी फिल्म पर लगाई रोक,पवन कल्याण के बेटे से जुड़ा है मामला
दिल्ली हाई कोर्ट ने एआई से बनी फिल्म पर लगाई रोक,पवन कल्याण के बेटे से जुड़ा है मामला

27 Jan 2026 |   35



 

नई दिल्ली।दिल्ली हाई कोर्ट ने एआई से बनी एक फिल्म के ब्रॉडकास्ट पर अंतरिम रोक लगा दी है।आरोप है कि इस फिल्म में बिना सहमति के आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और अभिनेता पवन कल्याण के बेटे अकीरा नंदन के नाम,इमेज, समानता,आवाज़ और पर्सनैलिटी का इस्तेमाल किया गया है।

बता दें कि दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस तुषार राव गेडेला ने यह आदेश 23 जनवरी को दिया था।यह आदेश संभवामी स्टूडियोज़ एल‌एलपी और दूसरे अनजान उल्लंघन करने वालों को अकीरा नंदन की पहचान का इस्तेमाल करके एआई से बना या डीपफेक कंटेंट बनाने,पब्लिश करने या शेयर करने से रोकता है,जिसमें यूट्यूब और दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होस्ट की गई एआई लव स्टोरी नाम की फिल्म भी शामिल है।

अकीरा नंदन ने दाखिल की थी अर्जी

21 वर्षीय अकीरा नंदन ने दिल्ली हाई कोर्ट में अर्जी देते हुए आरोप लगाया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करके बिना इजाज़त एक पूरी फिल्म बनाई गई,जिसमें उन्हें लीड कैरेक्टर के तौर पर दिखाया गया,जिससे उनकी पर्सनैलिटी,पब्लिसिटी और प्राइवेसी के अधिकारों का बड़े पैमाने पर उल्लंघन हुआ।

डीपफेक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल

कोर्ट को बताया गया कि फिल्म में नंदन के चेहरे के फीचर्स, आवाज़ और पर्सनैलिटी को बहुत सटीकता से कॉपी करने के लिए एडवांस्ड एआई मॉर्फिंग और डीपफेक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया,जिससे उनके शामिल होने और सहमति को गलत तरीके से दिखाया गया।

तेलुगु भाषा के वर्जन को 1,109,255 व्यूज़

कोर्ट ने देखा कि एआई से बनी फिल्म जिसका टाइटल एआई लव स्टोरी था,उसे यूट्यूब पर कई वर्जन में अपलोड किया गया था,जिसमें तेलुगु भाषा के वर्जन को 1,109,255 व्यूज़ मिले और इंग्लिश भाषा के वर्जन को 22 जनवरी तक 24,354 व्यूज़ मिले,जो दिखाता है कि कथित तौर पर उल्लंघन करने वाले कंटेंट का ऑनलाइन तेज़ी से और बड़े पैमाने पर फैलाव हुआ।

सोशल मीडिया पर नकली अकाउंट

एआई फिल्म के अलावा इस मामले में यूट्यूब,इंस्टाग्राम, फेसबुक और एक्स पर बड़ी संख्या में नकली अकाउंट,नकली प्रोफाइल और मोनेटाइज्ड सोशल-मीडिया पेज के बारे में डिटेल में बताया गया है,जो कथित तौर पर व्यूज,फॉलोअर्स और पैसे के फायदे पाने के लिए अकीरा नंदन के नाम,फोटो और उनकी इमेज का इस्तेमाल कर रहे थे।

अकीरा नंदन ने ये लगाया आरोप

अकीरा नंदन ने आरोप लगाया कि इनमें से कुछ अकाउंट उनके नाम पर डोनेशन मांग रहे थे,जिससे जनता के साथ धोखे और फाइनेंशियल गलत इस्तेमाल की चिंता बढ़ गई। कोर्ट ने केस के साथ अटैच किए गए कई एआई-जेनरेटेड विज़ुअल्स की जांच की और देखा कि मटीरियल से पता चलता है कि कैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल पहचाने जा सकने वाले लोगों से जुड़ी झूठी कहानियां बनाने के लिए किया जा सकता है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने ये कहा।

दिल्ली हाई कोर्ट ने दोहराया कि भारतीय कानून पब्लिसिटी के अधिकार को किसी व्यक्ति की पर्सनैलिटी के कमर्शियल इस्तेमाल पर उसकी ऑटोनॉमी की रक्षा के रूप में मान्यता देता है।कोर्ट ने कहा कि कोई भी व्यक्ति बिना इजाज़त के कमर्शियल फायदे के लिए किसी दूसरे के नाम,तस्वीर या लुक का प्रयोग करने का हकदार नहीं है।

अकीरा की फैन फॉलोइंग

जस्टिस गेडेला ने कहा कि हालांकि अकीरा नंदन अपने पब्लिक करियर के शुरुआती दौर में थे,लेकिन एआई से बनी फिल्म में उन्हें लीड कैरेक्टर के तौर पर दिखाना ही उनकी खास पहचान और पहचाने जाने लायक पर्सनैलिटी को दिखाता है।मामले के तथ्यों को पूरी तरह से देखने पर पहली नज़र में ऐसा लगता है कि वादी आंध्र प्रदेश राज्य में एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के एक बहुत जाने-माने परिवार से ताल्लुक रखने वाला एक जाना-माना नाम है।वादी हालांकि जवान है, लेकिन उसकी बहुत बड़ी फैन फॉलोइंग है,जो जनता और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में उसकी लोकप्रियता को दिखाता है।

जस्टिस गेडेला ने कहा....

जस्टिस गेडेला ने कहा कि इस बात को ध्यान में रखते हुए कि वह एक फिल्म में दिखे और तेलुगु फिल्म ओजी के म्यूजिक में भी योगदान देने का दावा करते हैं,इस स्टेज पर यह माना जा सकता है कि एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में उनकी अच्छी-खासी मौजूदगी है,हालांकि अभी यह शुरुआती दौर में है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने ये निकला नतीजा

दिल्ली हाई कोर्ट ने यह नतीजा निकाला कि अकीरा नंदन की पर्सनैलिटी और रेप्युटेशन को हुए किसी भी नुकसान की न तो पैसे के तौर पर पूरी भरपाई की जा सकती है और न ही अगर अंतरिम राहत देने से मना कर दिया जाता है तो उसे आसानी से ठीक किया जा सकता है।

नाम,तस्वीर और आवाज़ का इस्तेमाल

दिल्ली हाई कोर्ट ने एआई से बनी फिल्म एआई लव स्टोरी या उससे जुड़ा कोई भी कंटेंट बनाना,पब्लिश करना या फैलाने पर रोक लगा दी।कोर्ट ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डीपफेक या इसी तरह की टेक्नोलॉजी के ज़रिए अकीरा नंदन के नाम,तस्वीर,समानता,आवाज़,तौर-तरीकों या पर्सनैलिटी का इस्तेमाल करना या उसका फायदा उठाना या उनकी रेप्युटेशन को नुकसान पहुंचाने वाला खराब या हेरफेर किया हुआ कंटेंट बनाकर उनके प्राइवेसी के अधिकार का उल्लंघन नहीं किया जा सकता।इसके साथ ही कोर्ट ने मेटा प्लेटफॉर्म्स समेत सोशल मीडिया इंटरमीडियरीज को भी उल्लंघन करने वाले URLs को हटाने का निर्देश दिया।मुकदमे में पहचाने गए लोगों को और उल्लंघन करने वालों के संबंधित अकाउंट और आईपी डिटेल्स का खुलासा करने लिए कहा गया है।

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