मुजफ्फरनगर।देवाधिदेव महादेव का प्रिय महीना सावन में चारों तरफ भगवा ही भगवा नजर आ रहा है,कंधों पर कांवड़, होंठों पर हर हर महादेव और आंखों में महादेव के दर्शन की आस,कोई नौकरी की मन्नत लेकर चला है,कोई बीमारी दूर होने की प्रार्थना कर रहा है,कोई परिवार की खुशहाली मांग रहा है,लेकिन मुजफ्फरनगर के कांवड़ मार्ग पर इस बार एक ऐसी कांवड़ चल रही है,जिसकी मन्नत सबसे अलग है।
इस कांवड़ में न नौकरी की इच्छा है,न कारोबार की और न ही धन-दौलत की।बस एक ही दुआ है कि भोलेनाथ हमारे घरवाले हमारी शादी के लिए मान जाएं।हजारों कांवड़ियों के बीच यह जोड़ा लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींच रहा है।इस बार प्रेमी जोड़े ने आस्था में मोहब्बत का रंग घोल दिया है।
इस कहानी के दो किरदार मयंक और दीपिका हैं।मयंक खुर्जा के रहने वाले हैं और दीपिका बुलंदशहर की रहने वाली हैं। लगभग एक साल पहले मयंक और दीपिका की मुलाकात एक शादी समारोह में हुई थी।पहली मुलाकात,फिर बातचीत फिर दोस्ती और धीरे-धीरे दोस्ती प्यार में बदल गई।
मयंक और दीपिका ने सोचा कि अब अगला कदम शादी होगी, लेकिन फिल्मों की तरह यहां भी कहानी में एक मोड़ आ गया। घरवाले राजी नहीं हुए।दोनों ने समझाने की कोशिश की, उम्मीदें लगाईं,लेकिन बात नहीं बनी।फिर दोनों ने एक ऐसा फैसला किया,जो अब पूरे कांवड़ मार्ग पर चर्चा का विषय बना हुआ है।मयंक और दीपिका हरिद्वार पहुंचे,गंगाजल भरा। दोनों ने सामान्य कांवड़ नहीं उठाई। दोनों ने 111 लीटर गंगाजल की कांवड़ उठाई और पैदल यात्रा शुरू कर दी।इनकी मंजिल वह दिन है,जब दोनों एक-दूसरे का हाथ हमेशा के लिए पकड़ सकें।
मयंक कहते हैं कि हमने भोलेनाथ से सिर्फ एक ही मन्नत मांगी है कि दोनों परिवार हमारी शादी के लिए मान जाएं,उनकी आवाज में शिकायत कम और उम्मीद ज्यादा सुनाई देती है।
दीपिका कहती हैं कि उन्होंने 28 जुलाई को हरिद्वार से जल उठाया था,तब से हर दिन 15 से 20 किलोमीटर पैदल चल रही हैं।रास्ता आसान नहीं है,कंधों पर 111 लीटर गंगाजल का भार है,धूप है,बारिश है,थकान है,लेकिन इन सबसे बड़ी उनकी उम्मीद है।भगवान से बस यही प्रार्थना है कि हमारी शादी हो जाए।
मयंक बताते हैं कि उनके परिवार को तो दोनों के रिश्ते की जानकारी है,लेकिन वे अभी शादी के लिए तैयार नहीं हैं।वहीं दीपिका के परिवार को यह भी नहीं पता कि दोनों इस कांवड़ यात्रा में साथ चल रहे हैं।यानी एक तरफ 111 लीटर गंगाजल,दूसरी तरफ रिश्ते का बोझ और तीसरी तरफ उम्मीद कि शायद भोलेनाथ वहां रास्ता बना दें,जहां इंसानों की बातें नहीं बन पा रहीं।
मुजफ्फरनगर में कांवड़ मार्ग पर जैसे ही यह जोड़ा गुजरता है, लोग रुक जाते हैं,कोई वीडियो बनाता है,कोई तस्वीर खींचता है,कोई पूछता है कि इतनी बड़ी कांवड़,मन्नत क्या है और जब जवाब मिलता है शादी के लिए,तो कई चेहरों पर मुस्कान आ जाती है,राहगीर रुकते हैं,वीडियो बनाते हैं,हौसला बढ़ाते हैं. और कई लोग मुस्कुराते हुए कहते हैं भोलेनाथ सबकी सुनते हैं,तुम्हारी भी सुनेंगे,कुछ उनके लिए जयकारा लगाते हैं।
हर साल कांवड़ यात्रा में अलग-अलग तस्वीरें सामने आती हैं। कोई नंगे पैर चलता है,कोई सैकड़ों किलोमीटर दौड़कर जल लाता है,कोई अनोखी कांवड़ बनाकर निकलता है,लेकिन इस बार मयंक और दीपिका ने आस्था में मोहब्बत का रंग घोल दिया है,वे यह नहीं कह रहे कि भगवान उनकी किस्मत बदल दें।दोनों सिर्फ इतना चाहते हैं कि दोनों परिवार एक हो जाएं, उनकी यह यात्रा किसी के खिलाफ नहीं,किसी से लड़ने के लिए नहीं,बल्कि अपने रिश्ते के लिए आशीर्वाद मांगने की यात्रा है।मुजफ्फरनगर के कांवड़ मार्ग पर हजारों कांवड़ियों के बीच यह प्रेमी जोड़ा एक बात जरूर याद दिला रहा है कि कभी-कभी सबसे भारी कांवड़ 111 लीटर गंगाजल की नहीं होती,सबसे भारी कांवड़ होती है अपने प्यार को मंजिल तक पहुंचाने की उम्मीद।