नई दिल्ली।अमेरिका और ईरान तनाव के कारण भारत समेत विश्व में पैदा हुए गैस संकट के बीच एक राहत भरी खबर है।अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी का लिक्विफाइड नेचुरल गैस ले जा रहा एक और बड़ा टैंकर विश्व के सबसे संवेदनशील समुद्री रास्ते होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित पार कर चुका है। शिप-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार इस गैस शिपमेंट की अगली मंजिल भारत है।
बता दें कि ब्लूमबर्ग की ओर से जुटाए गए जहाजों की आवाजाही के आंकड़ों के मुताबिक ADNOC लॉजिस्टिक्स एंड सर्विसेज द्वारा संचालित टैंकर उम अल अश्तान ओमान के मस्कट शहर के उत्तर-पश्चिम में दोबारा देखा गया है। यह टैंकर पूरी तरह से एलएनजी गैस से लोड है और इसकी डेस्टिनेशन भारत दर्ज है। कुछ समय पहले ही एक टैंकर एलएनजी लेकर होर्मुज के रास्ते भारत के लिए निकला है।
होर्मुज से ऐसे निकला टैंकर
अमेरिका-ईरान के बीच तनाव के चलते इस समुद्री क्षेत्र में भारी सुरक्षा जोखिम बना हुआ है।इस जहाज ने 2 मई के आसपास अपना ट्रैकिंग सिग्नल भेजना बंद कर दिया था। उस समय यह खाली था और होर्मुज के पूर्वी मुहाने के पास खड़ा था।सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि सिग्नल बंद रहने के दौरान इस जहाज ने फारस की खाड़ी में स्थित एडनॉक के दास आइलैंड एक्सपोर्ट प्लांट से गैस लोड की।सुरक्षा कारणों से दास आइलैंड पर आने वाले अन्य एलएनजी टैंकर भी अपना पोजीशन ब्रॉडकास्ट (सिग्नल) बंद रखकर ही वहां डॉक कर रहे हैं।
ईरान युद्ध के बाद पहली बार बढ़ी हलचल
फरवरी के अंत में अमेरिका और ईरान में जंग शुरू होने के बाद से होर्मुज जलडमरूमध्य से एलएनजी का यातायात पूरी तरह से ठप हो गया था।ये रास्ते के बंद होने से विश्व की लगभग 20 फीसदी गैस आपूर्ति पूरी तरह से रुक गई थी। हालांकि अब इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से ऊर्जा की आवाजाही में मामूली तेजी देखी जा रही है। हाल ही में कम से कम दो गैर-ईरानी तेल सुपरटैंकर भी फारस की खाड़ी से बाहर निकले हैं।
भारत आ चुके हैं 4 शिपमेंट
एडनॉक अब तक इस खतरनाक रास्ते से कुल 4 एलएनजी शिपमेंट भेज चुका है। सुरक्षा के लिहाज से इन सभी टैंकरों ने जलमार्ग पार करते समय अपना ट्रैकिंग सिस्टम बंद कर दिया था। इनमें से आखिरी टैंकर वर्तमान में पश्चिमी भारत के एक बंदरगाह पर पहुंच रहा है।
कई जगह होता है एलएनजी का इस्तेमाल
एलएनजी का इस्तेमाल कई जगह होता है। गैस-आधारित पावर प्लांट्स में इसका उपयोग एक स्वच्छ विकल्प के रूप में होता है। वहीं सौर या पवन ऊर्जा की अनुपलब्धता के दौरान यह ग्रिड को तुरंत बैकअप पावर देने का काम करती है। घरों और कमर्शियल बिल्डिंग्स (होटल, मॉल आदि) में इसका इस्तेमाल खाना पकाने (रसोई गैस), वाटर हीटिंग और केंद्रीय हीटिंग सिस्टम में किया जाता है।